अनहद कलम
अनहद कृति
साहित्य की अनवरत बहती लहर (अंक ७: अक्टूबर २, वर्ष २०१४)
ISSN 2349-2791
अनहद कलम
'काव्य-उन्मेष-उत्सव' २०१४-१५ में हिस्सा लें


September 2014 Cover
संपर्क: anhadsahitya@gmail.com
सृष्टि सृजन के प्रथम दिवस से आधुनिकतम क्षण तक मनुष्य ने अन्वेषक जिज्ञासु के रूप में अनजाने ही दो पाषाणों के परस्पर टकराने से उत्पन्न चक-मक अग्नि-शिखाओं से विकास यात्रा की ओर कदम बढ़ाए। जो हज़ारों ख़तरों के बावजूद, अनेक चुनौतियों को स्वीकारते हुए बिना डगमगाए, प्रत्येक पड़ाव पर असफलता से सफलता की ओर, अन्धकार से आलोक की ओर, माया से मोक्ष की ओर, पराभव से विजय की ओर, दैन्य से ऐश्वर्य की ओर, निरंतर गहरे पानी पैठ गागर में सागर भरने की, नए नए सपनों के संसार साकार करने की ओर आज तक अग्रसर रहे हैं और आगे भी रहेंगे। यह अपने आप में मनुष्य के दुस्साहसपूर्ण संघर्ष की अनवरत कहानी है।

शब्द एक सशक्त माध्यम है जो करोड़ो लोगों के सुख-दुःख की गाथा स्वयं में समेटे हुए है। शब्द ने जहाँ खेतीहर किसान की वेदना व श्रम-जीवी की व्यथा और ग़रीबी से उपजे हाहाकार को जिया है वहीं मनुष्य की अपूर्व संपत्ति के गान, प्रकृतिश्री के रहस्यों को उजागर करती विज्ञान की आश्चर्यजनक उपलब्धियों का लेखांकन तथा विभिन्न भाषाओं में ज्ञान के निस्सीम क्षितिज छू लेने के विहंगम प्रयास किए हैं| शब्द में अभिव्यक्ति वैचारिक धरातल से जुड़े हुए जब काव्यात्मक रूप ले लेती है तो वह सुंदर कल्पना के परिधान में निष्कलंक सपनों के संसार की सृष्टि करती है। सपनों के इस संसार में राजा और रंक दोनों के साथ समान न्याय की संभावनाएं सृजित होती हैं जो मानव मात्र को समाज में व्याप्त कुरीतियों, व्याधियों, हीनताओं एवं विद्रूपताओं को समूल उखाड़ने की ओर प्रेरित करती हैं। शायद, इसीलिए कवि को क्रांति-दृष्टा एवं स्वप्न-सृष्टा जैसी संज्ञाओं से अभिहित किया गया है। आओ, हम और आप असीम ब्रह्माण्ड में असंख्य आकाश-गंगाओं एवं अनुपम तारावलियों के रहस्यमय सौन्दर्य से अविभूत कल्पनालोक में नए स्वप्नों की संभावनाओं को सृजित करते हुए, हमारे सौर-मंडल में स्थित धरती माँ के किसी कोने में बैठे अपने नगण्य अस्तित्व को परस्पर उपकृत करें तथा मानव-जाति की अनंत यात्रा में 'अनहद कृति' के माध्यम से मानव-समाज द्वारा सत्य खोजने के अथक प्रयास से जुड़ने का सार्थक प्रयत्न करें।


- पुष्प राज चसवाल